
अब्र के साये में रह मैं बूंदों को तरसता हूँ
बेखबर दरिया पे बरसते बादल को देखता हूँ
खवाबों में उस हसीन के खवाब देखता हूँ ,
गुजरते पलों से दिली उम्मीदों को बुनता हूँ
Saturday, July 9, 2011
कुछ ख्वाब बुनता हूँ
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Akki
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Monday, May 23, 2011
मुझे आशिक बन जाने दो
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आखरी बार ही सही मुझे हार जाने दो
मर के जी जाने दो जीकर मर जाने दो
सिला-ऐ-इश्क हमें ही है चुकाना जानशीं
ना सोचो कुछ मुझे मुफलिस हो जाने दो
शायद ये अब्रे जुल्फ कभी ना बरसेगा
पर उस आरज़ू में रूह तर कर जाने दो
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Sunday, May 8, 2011
जब याद बहुत दिल करता है
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रोता हूँ मैं बहुत, कभी मैं हंस लेता हूँ
वज़हे-खुशी खातिर तुझको याद कर लेता हूँ
बहुत दिल करता है तो खत लिख लेता हूँ
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Monday, May 2, 2011
हद से गुजर जाने दो मुझे
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ये अंजाम तो बर्बाद होने दो मुझे
अपनी ही नज़रों से गिरने दो मुझे
मुझे किसी संग दिल की याद में
शीशे सा टूटने दो, बिखरने दो मुझे
खता मेरी ही थी जिया उसके लिए
अब मौत की राह पर चलने दो मुझे
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Monday, April 11, 2011
सच हो या सपना
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वो मुक्त आकाश में पंछी स्वछंद
मेरी मित्र वो मेरे दिल की पसंद
जैसे हो ह्रदय की अविरामी गति
स्वयं राही है, वो स्वयं प्रगति
वो जैसे अधरों पे सजी मुस्कान
अतुल्य है उसका आत्मसम्मान
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Saturday, March 26, 2011
जब से उनसे मोहब्बत है
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दिलबर करते नहीं ऐतबार मेरा पर तहे दिल रहते हैं
वो हैं राहों से कोसों दूर पर हमसफ़र का हक रखते हैं
दिले नादाँ का भी क्या कसूर जो फ़िदा हुआ उनपे
हमनफस वो चेहरे पर कुछ फरिश्तों जैसा नूर रखते हैं
हमज़मीं से हम बस साथ है जीते हैं इस जहाँ में,
मैंने कब और कौनसा वो मेरे वादों पे एतिकाद करते हैं
होगा ये शब भर का चाँद दुनिया के लिए बहुत दूर
हम तो रोज की तन्हाई में बस उससे ही बात करते हैं
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Wednesday, March 2, 2011
कशमकश ऐ दीवानगी
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कहता रहा कि मोहब्बत है मुझे तुमसे बेइन्तेहाँ,
पर खुद ही क्यों अपने यार को रुसवा करता रहा
बस यूँ बिन सोचे जाने इकरारे इश्क किया मैंने,
कभी नहीं पूछा, क्यूँ तेरा दिल ऐसे जलता रहा
हो रहा है मुझे अब अपनी खताओं का एहसास,
किसी कोने में छुपकर कल रात भर मैं रोता रहा
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Friday, February 25, 2011
सुलझा अनसुलझा सवाल
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Wednesday, February 16, 2011
मेरा प्यार - उसकी मोहब्बत
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ताकती है वो राह, इन्तेज़ार ये उसका, है बड़ी बात
याद आई उसकी, और बस तुमने आँसूं बहा लिए,
समेटना आंसूं को पलकों में ही उसका, है बड़ी बात
प्यार है तुमसे, कह तुमने कर लिया हल्का दिल,
खामोशी से बरसों उसका इश्क करना, है बड़ी बात
Sunday, January 23, 2011
कभी यूँ हुआ भी होता
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कभी मै के नशे का खुमार उतरा भी होता
लाख कोशिश की पर मैं उसको भूला भी होता
दूर रह कर जिस्म में साँसें ले रहा उसका प्यार
मैंने कभी उसको यादों से अलग किया भी होता
जिस पर निसार किया मैंने ये दिलो जाँ,
कभी तो उसकी जुबां से इकरार सुना भी होता
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Sunday, January 2, 2011
यूँ मेरा दिल करे
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अब गैर सी हर पनाहों से गुजर जाने को दिल करे,
मैं हमराही नहीं, राहों से दूर निकल जाने को दिल करे
किसी के सहारे की ना आस ना आरजू है कोई ,
आसरे की हर ज़रुरत से अलग हो जाने को दिल करे
ख़ाक हो चुके गुलशने इश्क उस मगरूर खिज़ा में,
क्या ऐतबार, बहारों भी से परे चले जाने को दिल करे
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Saturday, December 25, 2010
देना ही है अगर
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शूल काँटें मेरी आहें अब और ना सता
गर जिल्लत ही देनी है मौला तो दे दे
रहम कर इज्जत के अलफ़ाज़ ना सुना
मौत ही बक्शी है जो तूने दर्दनाक तो
बहारे जिंदगी की झूठी राहें ना दिखा
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Monday, December 13, 2010
तेरा मेरा कल, तेरा मेरा आज
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खता ना तेरी ना मेरी, वक्त ही अलग सा था
था इश्क तेरे दिल में, और मेरे दिल में भी,
छाया था जो हम पर वो अब्र बदगुमानी का था
कड़कती बिजलियाँ, कहीं थी तेज आंधियाँ,
तेजाबी बारिश में कहीं कहीं दिल भी जला था
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Akki
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Wednesday, October 27, 2010
अनकहे लफ्ज़
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कभी कुछ तो कह पाऊँ खामोश हूँ कब से,
चुरा ले जाती हो क्यों मेरी नींद यूँ मुझ से
प्यार है बेइन्तेहाँ ये माना है मैंने,
हिम्मत ना जुटा पाया कि कह दूँ तुझ से
कोई ना जाने, हाले दिल जानूँ बस मैं,
चुप हूँ जब से प्यार का एहसास यूँ तुझ से
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Sunday, September 19, 2010
तेरे ख्यालों में
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समंदर की ताज तुम लहरें, कैसे तुम्हारा नसीब ना होगा
तैरोगी सरहदे समंदर, साहिल पे आके तुमको टूटना होगा |
मुझे दर्द ओ गम है, डर है तुमसे जुदाई का
डरता ना हो, ऐसा इस जहान में कोई इंसान ना होगा |
यूँ तो दिखलाता है बखूबी, कि तू पत्थर दिल है,
माने गर तेरी बात, सीने में धड़कन जैसा कुछ ना होगा |
पर उसमें भी है धड़कन, जो दिल तेरे सीने में हैं,
अब ज़ज्बात भरे हों जिसमें बेंतेहाँ, वो पत्थर ना होगा |
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Monday, August 30, 2010
देश परदेश - अपने पराये
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परदेस में बैठ कर, मेरा देश और अपना लगता है,
कभी सपनों को पूरा करना भी, एक सपना लगता है |
आये इतनी दूर यहाँ, कागज के टुकड़ों के खातिर,
खुद का जीवन, अब शाख से टूटा एक पत्ता लगता है |
खुद की आस, खुद की प्यास ना जाने कहाँ खो गयी,
चंद सिक्कों की भूख का असर दिल पे छाया लगता है |
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Akki
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Wednesday, July 21, 2010
जब इश्क मजबूर नज़र आता हो
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दिल के करीब चाहे मेरी कोई जगह ना हो |
हैं चाहे मेरी हर आहट अब भी पराई,
मेरी हर कोशिश में मतलब दिखता हो |
ना जाने कैसे समझा पायेगें हम उसको,
जब वो हर बात से कुछ अन्जाना सा हो |
तुमसे इतना इश्क है,कैसे भूलें तुमको,
जब तुमको भूलना जिंदगी भूलने जैसा हो |
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Wednesday, July 7, 2010
खुशी की बात करते हैं
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क्यूँ रोये हम, कुछ खुशी की बात करते हैं |
तेरे चेहरे के नूर का असर इस क़दर,
वो मेरे चेहरे पर खुशी का आगाज़ करते हैं |
इतनी बार बोला तुमने हमसे, कि प्यार है,
लो आज हम भी इज़हार-ऐ-मोहब्बत करते हैं |
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Akki
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Tuesday, June 29, 2010
दिल तेरी चाहत कर रहा है
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मुझे में तेरा प्यार कुछ और संवर रहा है |
ये जानते हो तुम भी, ना चाहा था मैंने
पर ख़ामोश कब से ये दिल जल रहा है |
रहा तू सदा बेखबर क्यूँ मुझसे, पूछता
तेरे ख़ातिर दिल क्या ख़याल बुन रहा है |
वस्ले वक्त अब सामने, खत्म है इन्तेज़ार,
दिल अब मिलन का इंतज़ार कर रहा है |
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Akki
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Sunday, June 27, 2010
जी चाहता है
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बातों से तेरी जी, जाने को जी चाहता है,
मोहब्बत ऐसी ही राज़दार होती है, दोस्तों,
हर किसी का ये, राज़ जानने को जी चाहता है |
तेरे आंसूं मैं ले लूं अपनी पलकों पर,
सिर्फ हंसी छोड़ दूँ, तेरे दामन में,
किसी की मोहब्बत होना, है खुशनसीबी,
तू खुश रहे, तुझे खुश देखने का जी चाहता है |
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Akki
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