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Saturday, September 18, 2010

कॉलेज का ज़माना

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वो भी क्या मस्ती का टाइम साला, क्या गफलत भरा ज़माना था
लेक्चरर को तंग कंरना तो बस, मस्ती का एक बहाना था

लड्डू बॉस,मिलिट्री ग्राउंड, रैगिग का शैशन, था इक बहाना,
वहीँ से बस एक जय-वीरू टाइप की दोस्ती को शुरू होना था |

कौशिक बॉस ने बहुत उड़ाया था, चील कौव्वे और कबूतर बना कर, 
अब ट्रिपल एस की क्लास में किसी को कुत्ता बिल्ली तो बनाना था |

भाई लेकिन यहाँ जान की परवाह तो सबको ही थी अपनी,
सो नो रिस्क,गोदारा की क्लास में सबको चुप बैठ जाना था

Wednesday, June 23, 2010

तेरा शुक्रिया कर रहा होता

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ऐ दोस्त अगर तेरी दोस्ती का सहारा ना होता,
गम की ना जाने किन गलियों में भटक रहा होता |

क्यूँ वक्त ने बना दिए हैं फासले हमारे बीच,
अगर होता बस में मेरे, फासले कम कर रहा होता |

टूटा टूटा, बिखरा बिखरा था यहीं कहीं,
तूने समेटा प्यार से, वरना मैं बिखरा ही रहा होता |

Monday, February 22, 2010

A Friendly Care !!!

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I know you are upset,
you are upset about it all,
no matter that is big or small.

you care for the people around you,
but never show them at all.