वो भी क्या मस्ती का टाइम साला, क्या गफलत भरा ज़माना था
लेक्चरर को तंग कंरना तो बस, मस्ती का एक बहाना था
लड्डू बॉस,मिलिट्री ग्राउंड, रैगिग का शैशन, था इक बहाना,
वहीँ से बस एक जय-वीरू टाइप की दोस्ती को शुरू होना था |
कौशिक बॉस ने बहुत उड़ाया था, चील कौव्वे और कबूतर बना कर,
अब ट्रिपल एस की क्लास में किसी को कुत्ता बिल्ली तो बनाना था |
भाई लेकिन यहाँ जान की परवाह तो सबको ही थी अपनी,
सो नो रिस्क,गोदारा की क्लास में सबको चुप बैठ जाना था


