Showing posts with label words2me. Show all posts
Showing posts with label words2me. Show all posts

Thursday, March 25, 2010

यूँ किसको मोहब्बत करते हो

0 comments

खुदा मान उसको यूँ सजदा करते हो,
सूनी ज़िन्दगी में किसे ढूँढा करते हो |

बस यादों के साए हैं जहाँ,
तुम उनमें घूमा करते हो |

कोई राज़ नहीं छुपा है इन आँखों में,
तुम उनमें क्या देखा करते हो |

Tuesday, March 16, 2010

ये खामोशी और दूरियां

0 comments




ना रहो चुप तुम, यूँ ही चुप रहना अपनों का, कहर होता है,
दुश्मनों की साज़िश और दोस्तों की चुप्पी में ज़हर होता है |

साथ नहीं हो तुम तो क्या 'नूर', तुम्हारा नज़ारा तो नज़र होता है |
सदायें नहीं आती कानों तक, पर उनकी दुआओं में वो ही असर होता है |

Monday, March 15, 2010

यादों के फूल

1 comments


Well never before, I wrote description of the inspiration, but I guess, this time I owe someone for this poem. It was just like that I saw book in hand of my fellow traveler when I was returning form Chennai, after my interview.
My eyes got stuck on that book, a flatten rose and pair of hands.
Then I went back in time to find what my friends used to tell me.
No one gave me rose to keep like that :), but I today I could sense the feeling they were having that moments.
At last I m so thankful to you Miss Co-traveler, that you help me to feel that feeling, which was next to impossible, if i were not seeing your book and flatten Rose.
This poem is dedicated to you and all, who respect the people who love 'em.

यादों के फूल
------------------
आज मैं फिर पुराने पलों से मिला,
किताब में रखा गुलाब फिर से खिला |

Saturday, March 13, 2010

सच्चा दिलासा

4 comments




माना की ज़िंदगी में गमों का साया है,
हर घड़ी हर वक़्त नया तूफान आया है,
पर हर तूफान के बाद,
मैने खुद को निखरा पाया है |

ऐसा नहीं है की दर्द नहीं हुआ मुझे,
हर कदम मुश्किलों ने बहुत रगड़ा है मुझे,
पर हर मुश्किल के बाद,
मैने खुद को बेहतर इंसान पाया है |

Tuesday, March 9, 2010

फलसफ़ा-ए-ज़िंदगी

0 comments


ज़िंदगी है एक बहती नदी,
बात ये है कही कभी अनकही,

मिल जाना है एक दिन,
इस बहती नदी को सागर में कहीं |

Monday, March 8, 2010

कहते उसे हैं ज़िंदगी

1 comments


जिया जिसके साथ चार पल,
लगा जिसके साथ ये दिल
कहते उसे हैं ज़िंदगी |

कौन जाने मिल पायें,या ना मिल पायें,
ना हो मुलाक़ात उससे,
कहते जिसे हैं जिंदगी |

जिया बस चार पल था मैं, तो क्या हुआ,
कम ही सही पर,
कहते उसे हैं ज़िंदगी |

Saturday, February 27, 2010

तन्हा रास्ते

1 comments


रफ़्ता रफ़्ता वक़्त गुजरता जा रहा है,
वो तन्हा इन रास्तों पर चला जा रहा है |

दिल में कुछ यादें और यादों के मंज़र ,
उनमें रहता बस उन्हीं को जीता जा रहा है |

वो जानशीं ही थी उसको सबसे अज़ीज़,
उसी का खवाबों में दीदार किया जा रहा है |

Friday, February 26, 2010

क्या ख्याल, कैसे सवाल

2 comments


दिल में आज ये ख्याल आया,
ना जाने कैसे ये अजब सवाल आया |

भरोसा है हमें तुम्हारी मोहब्बत पे,
पर ना जाने कैसा डर, उभर आया |

क्या होगा अगर, ना लौटे वो,
शायद उन्हें कोई और नज़ारा नज़र आया |

Tuesday, February 23, 2010

कुछ दिल ने कहा

2 comments


तेरी आँखें इस दिल को धड़का देतीं है,
तेरी तरफ आई हवा, ये समाँ महका देतीं है |

बिताए हमने सिर्फ कुछ पल साथ थे,
बीते वक़्त की बातें चहरे पर हंसी ला देतीं है |

आज तू साथ नहीं, तो क्या हुआ,
तेरी यादें तो मेरा साथ देतीं हैं |