
अब्र के साये में रह मैं बूंदों को तरसता हूँ
बेखबर दरिया पे बरसते बादल को देखता हूँ
खवाबों में उस हसीन के खवाब देखता हूँ ,
गुजरते पलों से दिली उम्मीदों को बुनता हूँ
Saturday, July 9, 2011
कुछ ख्वाब बुनता हूँ
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Akki
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Monday, May 2, 2011
हद से गुजर जाने दो मुझे
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ये अंजाम तो बर्बाद होने दो मुझे
अपनी ही नज़रों से गिरने दो मुझे
मुझे किसी संग दिल की याद में
शीशे सा टूटने दो, बिखरने दो मुझे
खता मेरी ही थी जिया उसके लिए
अब मौत की राह पर चलने दो मुझे
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Akki
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Saturday, March 26, 2011
जब से उनसे मोहब्बत है
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दिलबर करते नहीं ऐतबार मेरा पर तहे दिल रहते हैं
वो हैं राहों से कोसों दूर पर हमसफ़र का हक रखते हैं
दिले नादाँ का भी क्या कसूर जो फ़िदा हुआ उनपे
हमनफस वो चेहरे पर कुछ फरिश्तों जैसा नूर रखते हैं
हमज़मीं से हम बस साथ है जीते हैं इस जहाँ में,
मैंने कब और कौनसा वो मेरे वादों पे एतिकाद करते हैं
होगा ये शब भर का चाँद दुनिया के लिए बहुत दूर
हम तो रोज की तन्हाई में बस उससे ही बात करते हैं
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Akki
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Tuesday, January 25, 2011
हमने सिर्फ गणतंत्र मनाया
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हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सबको इसने अपने में समाया
मैंने सोचा कि सोचें इतने सालों में हमने क्या खोया पाया
कुछ भूख से रोते बिलखते बच्चों को भूखे पेट सोता पाया
शहीद जवानों के मौत के सदमे से माँ को पत्थर हुआ पाया
Sunday, November 28, 2010
हर क्षण द्वैतता का रण
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कोई और है या मैं हूँ इस क्रोध भीषण में
व्यथित हो मैंने दूंढा उसे यहाँ वहाँ जाने कहाँ,
दुःख व्यर्थ, वो तो है समाया मेरे हर कण में
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Akki
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Wednesday, October 27, 2010
अनकहे लफ्ज़
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कभी कुछ तो कह पाऊँ खामोश हूँ कब से,
चुरा ले जाती हो क्यों मेरी नींद यूँ मुझ से
प्यार है बेइन्तेहाँ ये माना है मैंने,
हिम्मत ना जुटा पाया कि कह दूँ तुझ से
कोई ना जाने, हाले दिल जानूँ बस मैं,
चुप हूँ जब से प्यार का एहसास यूँ तुझ से
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Akki
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Sunday, October 17, 2010
Video Blog : तन्हा रास्ते
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Sunday, September 19, 2010
तेरे ख्यालों में
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समंदर की ताज तुम लहरें, कैसे तुम्हारा नसीब ना होगा
तैरोगी सरहदे समंदर, साहिल पे आके तुमको टूटना होगा |
मुझे दर्द ओ गम है, डर है तुमसे जुदाई का
डरता ना हो, ऐसा इस जहान में कोई इंसान ना होगा |
यूँ तो दिखलाता है बखूबी, कि तू पत्थर दिल है,
माने गर तेरी बात, सीने में धड़कन जैसा कुछ ना होगा |
पर उसमें भी है धड़कन, जो दिल तेरे सीने में हैं,
अब ज़ज्बात भरे हों जिसमें बेंतेहाँ, वो पत्थर ना होगा |
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Akki
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Saturday, September 18, 2010
कॉलेज का ज़माना
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वो भी क्या मस्ती का टाइम साला, क्या गफलत भरा ज़माना था
लेक्चरर को तंग कंरना तो बस, मस्ती का एक बहाना था
लड्डू बॉस,मिलिट्री ग्राउंड, रैगिग का शैशन, था इक बहाना,
वहीँ से बस एक जय-वीरू टाइप की दोस्ती को शुरू होना था |
कौशिक बॉस ने बहुत उड़ाया था, चील कौव्वे और कबूतर बना कर,
अब ट्रिपल एस की क्लास में किसी को कुत्ता बिल्ली तो बनाना था |
भाई लेकिन यहाँ जान की परवाह तो सबको ही थी अपनी,
सो नो रिस्क,गोदारा की क्लास में सबको चुप बैठ जाना था
Sunday, September 5, 2010
मंज़र-ऐ-जिंदगी
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यूँ अचानक क्यूँ उड़ने लगी ख़ाक ख़ाक |
ये समां तो है सावन का फिर भी,
दिल क्यूँ जलने लगा, होने लगा राख राख |
मैंने तो बस इश्क किया, नहीं जुर्म कोई
फिर हर गली क्यूँ होने लगी मेरी बात बात |
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Akki
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Monday, August 30, 2010
देश परदेश - अपने पराये
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परदेस में बैठ कर, मेरा देश और अपना लगता है,
कभी सपनों को पूरा करना भी, एक सपना लगता है |
आये इतनी दूर यहाँ, कागज के टुकड़ों के खातिर,
खुद का जीवन, अब शाख से टूटा एक पत्ता लगता है |
खुद की आस, खुद की प्यास ना जाने कहाँ खो गयी,
चंद सिक्कों की भूख का असर दिल पे छाया लगता है |
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Wednesday, July 21, 2010
जब इश्क मजबूर नज़र आता हो
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दिल के करीब चाहे मेरी कोई जगह ना हो |
हैं चाहे मेरी हर आहट अब भी पराई,
मेरी हर कोशिश में मतलब दिखता हो |
ना जाने कैसे समझा पायेगें हम उसको,
जब वो हर बात से कुछ अन्जाना सा हो |
तुमसे इतना इश्क है,कैसे भूलें तुमको,
जब तुमको भूलना जिंदगी भूलने जैसा हो |
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Wednesday, July 7, 2010
खुशी की बात करते हैं
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क्यूँ रोये हम, कुछ खुशी की बात करते हैं |
तेरे चेहरे के नूर का असर इस क़दर,
वो मेरे चेहरे पर खुशी का आगाज़ करते हैं |
इतनी बार बोला तुमने हमसे, कि प्यार है,
लो आज हम भी इज़हार-ऐ-मोहब्बत करते हैं |
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Tuesday, June 29, 2010
दिल तेरी चाहत कर रहा है
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मुझे में तेरा प्यार कुछ और संवर रहा है |
ये जानते हो तुम भी, ना चाहा था मैंने
पर ख़ामोश कब से ये दिल जल रहा है |
रहा तू सदा बेखबर क्यूँ मुझसे, पूछता
तेरे ख़ातिर दिल क्या ख़याल बुन रहा है |
वस्ले वक्त अब सामने, खत्म है इन्तेज़ार,
दिल अब मिलन का इंतज़ार कर रहा है |
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Sunday, June 27, 2010
जी चाहता है
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बातों से तेरी जी, जाने को जी चाहता है,
मोहब्बत ऐसी ही राज़दार होती है, दोस्तों,
हर किसी का ये, राज़ जानने को जी चाहता है |
तेरे आंसूं मैं ले लूं अपनी पलकों पर,
सिर्फ हंसी छोड़ दूँ, तेरे दामन में,
किसी की मोहब्बत होना, है खुशनसीबी,
तू खुश रहे, तुझे खुश देखने का जी चाहता है |
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Wednesday, June 23, 2010
तेरा शुक्रिया कर रहा होता
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ऐ दोस्त अगर तेरी दोस्ती का सहारा ना होता,
गम की ना जाने किन गलियों में भटक रहा होता |
क्यूँ वक्त ने बना दिए हैं फासले हमारे बीच,
अगर होता बस में मेरे, फासले कम कर रहा होता |
टूटा टूटा, बिखरा बिखरा था यहीं कहीं,
तूने समेटा प्यार से, वरना मैं बिखरा ही रहा होता |
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Tuesday, June 22, 2010
निःशब्द हूँ मैं
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परिस्थितिवश या प्रेमवश,
निःशब्द हूँ मैं |
जीवन से प्यारे रिश्तों को,
यहीं छोड़ जाना है, यही सोच,
निःशब्द हूँ मैं |
Saturday, June 19, 2010
कितनी भी करो मोहब्बत कम लगे ...
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महक गुलाबों की, खुशबू ना लगे |
जीयो तुम जानेमन जी भर के,
एक जिंदगी कम होगी,तुमको मेरी उम्र लगे |
हसरतें पूरी होंगीं सारी तेरी,
चाहे तुझे अभी अपनी, खुशियाँ कम लगे |
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Akki
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Tuesday, June 8, 2010
चलो मिल जाएँ इसी बहाने
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रहे अब तलक दूर हम, चलो मिल जाएँ इसी बहाने |
सब रिश्ते चले जाते हैं, नहीं जाती ये दोस्ती,
क्यूँ याद रहती है, चाहे जाए कोई इसको लाख भुलाने |
गुलशन था तो तड़पता था, सहरा में मिली तेरी छांव,
याद नहीं,करे होंगें किसी जनम हमने अच्छे कारनामे |
Friday, May 28, 2010
उसकी तनहा रात, क्या यूँ ही चलेगी
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कब तक यूँ पलकों में वो आंसूं रोकती रहेगी,
उसकी तनहा रात, क्या यूँ ही चलेगी ?
उसके सीने में गम, कब तक पलेगें यूँ ही,
रोती होगी खुद में, जग को हंसाती रहेगी |
उसकी तनहा रात, क्या यूँ ही चलेगी ?

















