Friday, March 26, 2010

जीना यूँ इश्क में

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कोई है जो मेरा वहां इंतज़ार करता है
मेरे नाम को साँसों में पिरोया करता है |

फासला ये जो हैं हमारे बीच का ,
यही है जो मोहब्बत में रंग भरा करता है |

Thursday, March 25, 2010

यूँ किसको मोहब्बत करते हो

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खुदा मान उसको यूँ सजदा करते हो,
सूनी ज़िन्दगी में किसे ढूँढा करते हो |

बस यादों के साए हैं जहाँ,
तुम उनमें घूमा करते हो |

कोई राज़ नहीं छुपा है इन आँखों में,
तुम उनमें क्या देखा करते हो |

Wednesday, March 24, 2010

ज़ज्बा ऐ इश्क

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यूँ तो मिली सौ बेचैनियाँ , सौ राहतें ,
एक बस तू ही नहीं जिसकी हैं चाहतें |

हो दिल के करीब इतने तुम,
फिर भी क्यों लगते हैं फासलें |

तेरी जुदाई में लम्हे , दिन,
दिन, महीने, साल हैं बनते  |

Sunday, March 21, 2010

अब प्यार है तो है

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वो नहीं मेरा, मगर उससे मोहब्बत है, तो है,
ये अगर रस्मों रिवाजों से बगावत है, तो है |

सच को मैंने सच कहा,जब कह दिया तो कह दिया,
अब ज़माने की नज़र में ये हिमाकत है, तो है |

दोस्त बनकर दुश्मनों सा,वो सताता है मुझे,
फिर भी उस जालिम पे मरना अपनी फितरत है, तो है |

कौन इश्क समझ पाया

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Well again, this is Sandesh Boss's Day.
we were just talking about our creation, I was telling him some of my old poems, them he wrote, following lines on me.
likhte likhe wo yun gazal hi ban gayi ....
Here I am sharing what he said about me.

नूर तुम जलाते रहे जिंदगी को यूँ ही,
ज़र्रे की तज्जली को वो एक शख्श समझ न पाया | [तज्जली = रौशनी]

अब तो ख्वाइश की वो रहे खुश हमेशा
कभी करेंगे हिसाब,की इश्क में क्या खोया.क्या पाया |

अपनी ख़ुशी को बेच दिया साकी के एक इशारे पर,
जाने इस रिंद को अब कौनसा नशा छाया | [रिंद = शराबी]