Sunday, January 23, 2011

कभी यूँ हुआ भी होता

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कभी मै के नशे का खुमार उतरा भी होता
लाख कोशिश की पर मैं उसको भूला भी होता

दूर रह कर जिस्म में साँसें ले रहा उसका प्यार
मैंने कभी उसको यादों से अलग किया भी होता

जिस पर निसार किया मैंने ये दिलो जाँ,
कभी तो उसकी जुबां से इकरार सुना भी होता

Sunday, January 2, 2011

यूँ मेरा दिल करे

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अब गैर सी हर पनाहों से गुजर जाने को दिल करे,
मैं हमराही नहीं, राहों से दूर निकल जाने को दिल करे

किसी के सहारे की ना आस ना आरजू है कोई ,
आसरे की हर ज़रुरत से अलग हो जाने को दिल करे

ख़ाक हो चुके गुलशने इश्क उस मगरूर खिज़ा में,
क्या ऐतबार, बहारों भी से परे चले जाने को दिल करे

Saturday, December 25, 2010

देना ही है अगर

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मेरे सामने हमेशा रास्ता-ऐ-उल्फत रहा
शूल काँटें मेरी आहें अब और ना सता

गर जिल्लत ही देनी है मौला तो दे दे
रहम कर इज्जत के अलफ़ाज़ ना सुना

मौत ही बक्शी है जो तूने दर्दनाक तो
बहारे जिंदगी की झूठी राहें ना दिखा

Monday, December 13, 2010

तेरा मेरा कल, तेरा मेरा आज

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तुझसे अलग मैं, मुझसे तू थोड़ा दूर ज़रा था
खता ना तेरी ना मेरी, वक्त ही अलग सा था

था इश्क तेरे दिल में, और मेरे दिल में भी,
छाया था जो हम पर वो अब्र बदगुमानी का था

कड़कती बिजलियाँ, कहीं थी तेज आंधियाँ,
तेजाबी बारिश में कहीं कहीं दिल भी जला था

Sunday, November 28, 2010

हर क्षण द्वैतता का रण

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क्षत-विक्षत शरशैया पे लेटा भीष्म सा मन में,
और मैं ही लड़ता अजर अमर हरि सा रण में

ये मैं हूँ या कौन जो प्रेमपंख पर बैठा है,
कोई और है या मैं हूँ इस क्रोध भीषण में

व्यथित हो मैंने दूंढा उसे यहाँ वहाँ जाने कहाँ,
दुःख व्यर्थ, वो तो है समाया मेरे हर कण में