आज सोचता रहा तेरी किन अदाओं पर लिखूँ,
उन अदाओं से बार बार हुई मोहब्बतों पर लिखूँ |
अपने पहले पहल हुए मिलन की उत्सुकता पर,
या तेरे कूचे से वापसी की बोझिल साँसों पर लिखूँ |
उस दिन तेरे मेरे बीच की बातों मुलाकातों पर,
या उन बातों की मीठी मीठी यादों पर लिखूँ |
प्यार हुआ तेरे से यूँ पहली नज़र में,
मेरे इकरार पर, या तेरे मीठे इनकारों पर लिखूँ |
पुकारता हूँ तेरा नाम, मैं यूँ सरे आम,
मेरी आजादी, या तुझ पर लगे बंधनों पर लिखूँ |
कुछ तो इस ज़ालिम ज़माने के दस्तूर पर,
या इश्क पर लगी खुदगर्ज़ पाबंदियों पर लिखूँ |
ये जो उपर वाले ने दिया है पाक तोहफा मुझे,
इस पे ज़माने की लगायी बेमानी तोहमतों पर लिखूँ |
लो 'नूर' दिल ही बागी हुआ तुम्हारा इश्क में,
क्या अब दिल की बगावतों के किस्सों पर लिखूँ |
उन अदाओं से बार बार हुई मोहब्बतों पर लिखूँ |
अपने पहले पहल हुए मिलन की उत्सुकता पर,
या तेरे कूचे से वापसी की बोझिल साँसों पर लिखूँ |
उस दिन तेरे मेरे बीच की बातों मुलाकातों पर,
या उन बातों की मीठी मीठी यादों पर लिखूँ |
प्यार हुआ तेरे से यूँ पहली नज़र में,
मेरे इकरार पर, या तेरे मीठे इनकारों पर लिखूँ |
पुकारता हूँ तेरा नाम, मैं यूँ सरे आम,
मेरी आजादी, या तुझ पर लगे बंधनों पर लिखूँ |
कुछ तो इस ज़ालिम ज़माने के दस्तूर पर,
या इश्क पर लगी खुदगर्ज़ पाबंदियों पर लिखूँ |
ये जो उपर वाले ने दिया है पाक तोहफा मुझे,
इस पे ज़माने की लगायी बेमानी तोहमतों पर लिखूँ |
लो 'नूर' दिल ही बागी हुआ तुम्हारा इश्क में,
क्या अब दिल की बगावतों के किस्सों पर लिखूँ |
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